भारतीय संविधान (constitution of India)
*भारतीय संविधान*
. हम सब इस आर्टिकल में भारतीय संविधान के बारे में पढ़ेंगे।
*हमारा संविधान देश का एक मौलिक एवं सर्वोच्च कानून है, जिसके अंतर्गत सरकार के गठन की विधि, प्रकृति शक्तियां एवं जिम्मेदारियां का उल्लेख किया गया है।
या हमें अपने नागरिकों के विषय में तथा हमारे नागरिकों को उनके अधिकारों व कर्तव्य के विषय में जानकारी प्रदान करती है।
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| Constitution of India |
*संविधान क्या है*?
किसी भी देश की सामाजिक राजनीतिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था के अनुरूप सरकार की नीतियों एवं कार्यों को संचालन करने की वैधानिक प्रक्रिया को "संविधान" कहते हैं।
*भारतीय संविधान का विकास*
. भारतीय संविधान एक लंबे संवैधानिक विकास का परिणाम है जिसकी शुरुआत ब्रिटिश शासन काल में ही बनाए गए थे अनेक अधिनियमों द्वारा हुई। भारतीय संविधान की शुरुआत सर्वप्रथम रेगुलेटिंग एक्ट 1773 से हुई।
*1773 ई का रेगुलेटिंग एक्ट_
. इस एक्ट को 1773 ईस्वी में ब्रिटिश संसद द्वारा पास किया गया तथा 1774 ईस्वी में इसे लागू किया गया।
. कोलकाता में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश था तीन अपर न्यायाधीश होते थे।
. कंपनी के शासन पर संसदीय नियंत्रण स्थापित किया गया।
. इस एक्ट के तहत कोलकाता के गवर्नर को बंगाल बिहार तथा उड़ीसा के लिए भी विधि बनाने का अधिकार दिया गया तथा मद्रास एवं बंबई प्रेसीडेंसी ओ को कोलकाता प्रेसिडेंसी के अधीन कर दिया गया जिसका प्रमुख एक गवर्नर जनरल होता था।
. पहले गवर्नर जनरल लॉर्ड वारेन हेस्टिंग्स थे।
. कंपनी के कर्मचारियों के निजी व्यापार एवं भारतीयों से रिश्वत व उपहार पर प्रतिबंध।
*1784 ई का पिट्स इंडिया एक्ट_
. इस अधिनियम के द्वारा द्वैध शासन की शुरुआत हुई जो 1858 तक विद्यमान रही। एक कंपनी के द्वारा तथा दूसरा संसदीय बोर्ड के द्वारा
. इसी के तहत राजनीतिक मामलों के लिए बोर्ड आफ कंट्रोल एवं व्यापारिक मामलों के लिए कोर्ट ऑफ डायरेक्टर की स्थापना की गई।
. इस एक्ट के तहत गवर्नर जनरल की परिषद की संख्या तीन कर दी गई, और गवर्नर को परिषद पर विशेष अधिकार दिया गया।
. इस एक्ट के विवाद को लेकर ब्रिटेन में लाट नार्थ तथा फॉक्स की मिली जुली सरकार को त्यागपत्र देना पड़ा था यह पहला और अंतिम अवसर था जब किसी भारतीय मामले पर ब्रिटिश सरकार गिर गई थी।
*1935 का भारतीय प्रशासन अधिनियम_
. इस अधिनियम में 321 धाराएं और 10 अनुसूचियां थी परंतु प्रस्तावना नहीं थी।
. इस अधिनियम के द्वारा अखिल भारतीय संघ की स्थापना की गई जिसे 11 ब्रिटिश प्रांतो ,6 चीफ कमिश्नर के क्षेत्रों और उन देसी रियासतों से मिलकर बना था। जो स्वेच्छा से संघ में सम्मिलित हों।
. इसमें गवर्नर द्वारा शासित प्रांतों और देसी रियासतों को मिलाकर एक भारतीय संघ की स्थापना का प्रावधान था।
. इस अधिनियम के द्वारा प्रति में द्वैध शासन व्यवस्था का अंत कर उन्हें एक स्वतंत्र स्वशासित संवैधानिक आधार प्रदान किया गया।
6 प्रांतों में दो सदन बने जिन्हें विधान परिषद और विधानसभा का गया। शेष प्रांतों में केवल विधानसभा नामक एक सदन वाला विधानमंडल बनाया गया।
. इस अधिनियम के द्वारा संघीय न्यायालय की व्यवस्था की गई जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश तथा दो अन्य न्यायाधीश होते थे,
न्यायालय से संबंधित अंतिम शक्ति पृव काउंसिल को प्राप्त थी।
*1935 ई के अधिनियम पर भारतीयों द्वारा प्रतिक्रिया_
. जवाहरलाल नेहरू ने इसे अप्रजातांत्रिक अनैच्छिक और अराष्ट्रवादी संविधान की संज्ञा दी। तथा इसे इसे दासता का नया चार्टर कहा, एवं इस वैसी मशीन की संज्ञा दी जिसमें इंजन नहीं है परंतु ब्रेक अनेक है।
. जिन्ना ने इसे पूर्णता सड़ा हुआ, मूल रूप से बुरा और अस्वीकृत बतलाया।
. मदन मोहन मालवीय ने इसे बाय रूप से जनतंत्र वादी एवं अंदर से खोखला बताया ।
*1947 ईस्वी का भारतीय स्वाधीनता अधिनियम_
. हाउस ऑफ कॉमंस द्वारा 15 जुलाई 1947 ई को पारित इस एक्ट का उद्देश्य लॉर्ड माउंटबेटन की 3 जून की कार्य योजना को कानूनी जामा पहनाने का था।
. इस अधिनियम को 18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश क्रॉउन द्वारा स्वीकृत कर लिया गया। इसमें 20 धाराएं थी।
. इस एक्ट में 15 अगस्त 1947 ई से भारत और पाकिस्तान नामक दो नए राष्ट्रों के गठन का प्रावधान था।
. दोनों प्रस्तावित राष्ट्रों में संविधान सभा ओं का विधान मंडल एवं संविधान निर्माण का दोहरा कार्य प्रदान किया गया।
. नए संविधान पारित हो जाने तक दोनों राष्ट्रों तथा सभी प्रति का शासन भारतीय शासन अधिनियम 1935 के अनुरूप चलाया जाना था।
. इस एक्टर ने देसी रियासतों से ब्रितानी सम्राट की संप्रभुता या आधी राजत्व को समाप्त कर दिया।
. देसी रियासतों और उनके शासको के संबंध में है हिस मजेस्टी द्वारा किए जाने वाले सभी प्रकार के कार्य सभी संधिया और समझौते 15 अगस्त 1947 को व्यपगत हो जाने थे।
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