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Showing posts from July, 2023

Interesting facts in hindi(हिंदी का रुचिकर तथ्य)

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                            हैरान कर देने वाले रोचक तथ्य मानव के हैरान कर देने वाले रोचक तथ्य .किसी नवजात बच्चे को पैदा करते समय  माँ को 20 हड्डियों के टूटने के समान दर्द का सामना करना पड़ता है। . बार _बार नाखून काटने का मतलब है  कि इंसान की अजीब तरह के समस्या से परेशान  है।  .इंसान  अपनी हड्डियों के कारण ही चल पाता है और एक जगह खड़ा रह सकता हैं , इसलिए हड्डियों का महत्व अधिक है। . जब कोई इंसान सत्य कह रहा होता हैं तो वह अपने हाथों को कई बार हिलाता रहता हैं , लेकिन  झूठ बोलते वक्त वो किसी तरह का भी क्रिया नहीं  करता है। .जागते समय एक मनुष्य का मस्तिष्क 10 से 23 वाट की इलेक्ट्रिसिटी छोड़ता है जिससे एक बल्ब जल सकता है। .किसी इंसान को जब ज्यादा हंसी आती हो तो उसके हाथ में अचानक चींटी काटने से उसकी सारी हंसी बंद हो जाएगी। . मनुष्य नाखून का कलर उसके अच्छे सेहत का सही जानकारी देता हैं। .इंसान के सबसे ज्यादा क्रियाशील उंगली अंगूठे के बगल वाली होती हैं। . लगभग 6 महीने के बच्चे को रोने पर उसके...

Doctor Bhimrao ambedkar biography

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 लोकप्रिय श्री डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म मध्यप्रदेश राज्य  के इंदौर शहर में महू  नामक गांव में हुआ था जिसका नाम अब बदल कर डॉ.अंबेडकर नगर रख दिया गया था। डॉ भीमराव अंबेडकर जी का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था। डॉ भीमराव अंबेडकर दलित जाति के थे। उनकी जाति एक छोटी जाती मानी जाती थी। इसलिए उनका बचपन बहुत दुखद कटा। श्री अंबेडकर जी सहित सभी छोटी जाती  के लोगों को सामाजिक बहिष्कार, अपमान और भेदभाव का सामना करना पड़ता था। आइए और इस ब्लॉग में विस्तार से जानते हैं Dr Bhimrao Ambedkar Biography in Hindi के बारे में विस्तार से। Dr.BR Ambedkar  जन्म 14 अप्रैल 1891  मध्य प्रदेश, इंडिया  बचपन का नाम _ भिवा, भीम, भीमराव, बाबासाहेब अंबेडकर दूसरा नाम  बाबासाहेब अंबेडकर  धर्म_ बौद्ध धर्म शैक्षिक सम्बद्धता • मुंबई विश्वविद्यालय (बी॰ए॰) • कोलंबिया विश्वविद्यालय (एम॰ए॰, पीएच॰डी॰, एलएल॰डी॰) लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स  (एमएस०सी०,डीएस॰सी॰) ग्रेज इन (बैरिस्ट           बाबासाहेब अंबेडकर का बचपन Dr Bhimrao Ambedkar Biography in Hindi  ...

अब मानव होने जा रहा है अमर

क्या आप जानते हैं कि अब इंसान भी अमर हो सकते हैं आपको यह जानकर बहुत ही हैरानी होगी कि वैज्ञानिकों के द्वारा इंसानों को अमर करने के लिए खोज की जा रही है इस खोज में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि समुंद्र में पाई जाने वाली जेलीफिश जो लगभग डायनासोर्स के समय से 50000 वर्ष पुराने हैं वह अभी भी जीवित हैं यह हमेशा ही जिंदा रह सकती और यह  बुढ़ापे के बाद जवान हो सकती है और जवान होने के बाद पुनः वृद्धावस्था में आ जाती है यह प्रक्रिया बार-बार होती है और जेलीफिश कभी नहीं मरती है l अब आप सोच रहे होंगे कि यह कैसे होता होगा यह जेलीफिश लगभग सभी महासागरों में पाई जाती है ज्यादातर जेलीफिश जवान नहीं हो पाती क्योंकि वह दूसरों का भोजन बन जाती हैं परंतु जो जेलीफिश जवान होने के बाद वृद्धावस्था में आती है वह पुनः युवा बन जाती है इसके लिए इन्हें महासागर के तल में एक्सिस्ट के रूप में जमना पड़ता है और इससे पॉलिप कॉलोनी का निर्माण करती है यह ऐसा ही है जैसे एक तितली  कैटरपिलर बनने के लिए कोकून में वापस जा रही हो इस पॉलिप कॉलोनी से कई ढेर सारी जेलीफिश बन जाती हैं सिर्फ 30 दिनों में ही जेलीफिश  फिर जवान ...

Baba bageshwardham dhirendra sashtri biography

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  गढ़ा में रामकृपाल और सरोज के घर 1996 में धीरेंद्र पैदा हुए तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े धीरेंद्र थे।  बागेश्वर धाम साइट के द्वारा पता चलता है कि धीरज शास्त्री का बचपन तंगहाली में बीता, कर्मकांडी परिवार था, पूजा पाठ में जो दक्षिणा मिल जाती थी उसी से 5 परिवार का पालन पोषण होता है। धीरेंद्र ने अपने दादा से सैतू लाल गर्ग से पंडिताई सीखी, धीरेंद्र अचानक एक बार अज्ञातवास हो गए, किसी गांव वाले ने बताया कि धीरेंद्र 1 साल के लिए गांव से गायब हो गए थे। पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी  लौटे तो एकदम अलग थे, बागेश्वर धाम में प्राचीन शिव मंदिर था उसी के बगल में बालाजी का मंदिर था। वहां के विधायक कहते थे कि उनके पास घर द्वार कुछ नहीं था पास में एक सामुदायिक भवन था जिसमें बरसाती डालकर एवं पूजा पाठ करके रहते थे, गांव वाले मदद करते थे धीरे-धीरे उन्होंने दरबार लगाना शुरू किया, धीरेंद्र के आगे बढ़ने में इंटरनेट और सोशल मीडिया का बहुत अहम रोल है। जिससे आज उनके लाखों समर्थक है धीरेंद्र के दरबार में जाने के लिए टोकन लगाना पड़ता है, धीरेंद्र के बढ़ते गड़ा गांव में व्यवसायिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़...